ढाई किलो हाथी दांत के साथ वन्यजीव तस्कर गिरफ्तार, दिल्ली बेचने जा रहा था कीमती दांत

 
Elephant Tusk Smuggling

बुग्गावाला में एसटीएफ का बड़ा ऑपरेशन

उत्तराखंड की विशेष कार्य बल (एसटीएफ) ने बुग्गावाला क्षेत्र में एक बड़ी सफलता हासिल की है। टीम ने वन्यजीव अंगों की अवैध तस्करी में शामिल एक तस्कर को गिरफ्तार किया है। उसके पास से करीब ढाई किलो वजन का एक हाथी दांत बरामद किया गया। बताया जा रहा है कि आरोपी इसे दिल्ली में बेचने की योजना बना रहा था।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि दिल्ली से उन्हें सूचना मिली थी कि बुग्गावाला में हाथी दांत तस्करी का गिरोह सक्रिय है। इस सूचना पर तुरंत कार्रवाई करते हुए इंस्पेक्टर यशपाल सिंह के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई।


सूचना के आधार पर छापा और गिरफ्तारी

टीम ने बुग्गावाला से बिहारीगढ़ की ओर आने वाले मार्ग पर घेराबंदी की। इसी दौरान एक संदिग्ध व्यक्ति को पकड़ा गया जिसकी पहचान गुलाम हसन निवासी दौलतपुर हजरतपुर उर्फ बुधवासईद थाना बुग्गावाला के रूप में हुई। तलाशी के दौरान उसके पास से लगभग 22 इंच लंबा और ढाई किलो वजन का हाथी दांत बरामद हुआ।

पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह यह दांत दिल्ली के एक ग्राहक को बेचने जा रहा था। लेकिन एसटीएफ ने उसे रास्ते में ही पकड़ लिया। फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर यह जानने की कोशिश कर रही है कि इस हाथी दांत तस्करी में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।


गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी

एसटीएफ के अधिकारियों का कहना है कि यह अकेला व्यक्ति नहीं हो सकता। संभावना है कि इसके पीछे एक बड़ा गिरोह काम कर रहा है, जो जंगलों से वन्यजीवों के अंगों की तस्करी कर उन्हें दिल्ली या अन्य राज्यों में बेचता है।

टीम अब आरोपी के मोबाइल डेटा, कॉल रिकॉर्ड और बैंक ट्रांजेक्शन की जांच कर रही है ताकि नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचा जा सके। साथ ही आरोपी के पुराने आपराधिक इतिहास की भी जानकारी जुटाई जा रही है।


तीन हाथियों की संदिग्ध मौतों से बढ़ा शक

इस इलाके में पहले से ही हाथी दांत तस्करी को लेकर संदेह था। बुग्गावाला क्षेत्र में इस साल तीन हाथियों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई है। इनमें से दो मौतें तो एक माह के भीतर हुई थीं।

स्थानीय लोगों ने बताया कि एक हाथी की मौत के बाद उसका एक दांत गायब था। यह घटना वन विभाग की सक्रियता पर सवाल खड़े करती है। वन विभाग ने उस समय ग्रामीणों को हाथियों के शव के पास जाने से मना कर दिया था। लेकिन क्षेत्र में चर्चा थी कि वन्यजीव तस्करों ने मौके का फायदा उठाया और दांत निकाल लिए।


वन विभाग की जांच और पूछताछ जारी

वन विभाग ने पिछले महीने कुछ ग्रामीणों को हिरासत में लेकर पूछताछ भी की थी। लेकिन अब एसटीएफ की यह कार्रवाई इस शक को और गहरा कर रही है कि क्षेत्र में हाथी दांत तस्करी का एक संगठित नेटवर्क मौजूद है।

अधिकारियों का कहना है कि यह गिरोह लंबे समय से वन्यजीवों के अंगों की अवैध बिक्री में शामिल हो सकता है। यह भी संभावना जताई जा रही है कि हाथियों की मौतें प्राकृतिक नहीं थीं, बल्कि तस्करों की साजिश का परिणाम थीं।


वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत कड़ी कार्रवाई

भारत में हाथी दांत तस्करी को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत गंभीर अपराध माना जाता है। इस कानून के अनुसार, किसी भी प्रकार के हाथी दांत या उससे बने उत्पादों की बिक्री, खरीद या परिवहन पूरी तरह प्रतिबंधित है।

इस अधिनियम के उल्लंघन पर दोषी को सात साल तक की कैद और भारी जुर्माना हो सकता है। एसटीएफ का कहना है कि बरामद दांत की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में लाखों रुपये बताई जा रही है।


स्थानीय प्रशासन और वन विभाग की भूमिका पर सवाल

तीन हाथियों की संदिग्ध मौतों और तस्करी के इस नए खुलासे के बाद स्थानीय प्रशासन और वन विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वन्यजीव अपराधों को रोकने के लिए केवल गिरफ्तारी काफी नहीं है, बल्कि निगरानी प्रणाली को मजबूत करना आवश्यक है।

वन्यजीव विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि जंगलों में ड्रोन निगरानी बढ़ाई जाए, ताकि तस्करों की गतिविधियों का समय पर पता लगाया जा सके।


प्राकृतिक धरोहर की सुरक्षा का सवाल

भारत में हाथी को "राष्ट्रीय विरासत पशु" का दर्जा प्राप्त है। इसके बावजूद लगातार हो रही हाथी दांत तस्करी देश की जैव विविधता के लिए खतरा बन रही है। सरकार और समाज दोनों को मिलकर इस अपराध पर रोक लगानी होगी।

विशेषज्ञों ने कहा कि तस्करों पर सख्त कार्रवाई के साथ-साथ स्थानीय समुदायों को भी जागरूक किया जाना चाहिए ताकि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत प्रशासन को दें।


FAQ (सामान्य प्रश्न)

प्रश्न 1: भारत में हाथी दांत तस्करी क्यों प्रतिबंधित है?
उत्तर: वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत हाथी दांत की बिक्री या परिवहन पूरी तरह अवैध है, क्योंकि यह वन्यजीवों की हत्या और जैव विविधता को नुकसान पहुंचाता है।

प्रश्न 2: तस्करी में पकड़े जाने पर क्या सजा हो सकती है?
उत्तर: दोषी को सात साल तक की सजा और लाखों रुपये जुर्माना हो सकता है।

प्रश्न 3: बुग्गावाला में कितने हाथियों की मौत हुई है?
उत्तर: इस साल अब तक तीन हाथियों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई है, जिससे वन विभाग की भूमिका पर सवाल उठे हैं।

प्रश्न 4: क्या तस्करी गिरोह में और लोग शामिल हैं?
उत्तर: एसटीएफ के अनुसार, आरोपी से पूछताछ के बाद अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।

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